मनुष्य के शरीर में सबसे सर्वश्रेष्ठ ऊर्जा काम की शक्ति है। काम से नफरत नहीं करनी है काम के प्रति घृणा नहीं करनी है काम को जीवन मैं स्वीकार करना है। सबसे बड़ी ऊर्जा काम की शक्ति होती है। जिससे मनुष्य जीव पैदा करता है। काम की शक्ति के माध्यम से ही परमात्मा मनुष्य को जन्म देने के काबिल बनाता है। काम ही वह शक्ति है जिससे मनुष्य जीव को पैदा करता है। संभोग ही वह समय होता है जब मनुष्य परमात्मा के बहुत निकट होता है। मनुष्य जब अपनी पत्नी के साथ उस अनुभूति को महसूस कर लेता है तब उसकी तृप्ति खत्म हो जाती है और उसकी संभोग से रुचि खत्म होने लगती है। पुरुष जब अपनी पत्नी के साथ उसे स्थिति को महसूस कर लेता है उसकी तृप्ति जब खत्म हो जाती है तब उसे दुनिया की सारी स्त्रियां मां और बहन जैसी नजर आने लगते हैं। उस वक्त पति और पत्नी का प्रेम आध्यात्मिक तल पर पहुंच जाता है। मनुष्य की सबसे बड़ी ऊर्जा काम है ।काम से नफरत नहीं करनी है काम को पवित्र मानना है , उसे स्वीकार करना है।।यह वही ऊर्जा है जिससे जीव पैदा होते हैं।यह वही ऊर्जा है जिसके द्वारा परमात्मा मनुष्य को जन्म देने के काबिल बनाते हैं ।...