मेडिटेशन की शिक्षा की भारत में जरूरत
मेडिटेशन को शिक्षा नीति में शामिल करना चाहिए। मेडिटेशन को 13 वर्ष की उम्र से लेकर ग्रेजुएशन पोस्ट ग्रेजुएट कोई भी किसी भी प्रकार की डिग्री या डिप्लोमा हर कोर्स में कॉलेज में विद्यालय में यूनिवर्सिटी में स्कूल में मेडिटेशन को शामिल करना चाहिए। स्कूल में विश्वविद्यालय के सिलेबस में मेडिटेशन को एक कोर्स के तौर पर रखना चाहिए उसकी क्लास होनी चाहिए।
देश को अंदाजा भी नहीं होगा लेकिन मेडिटेशन को शिक्षा नीति में शामिल करने के बाद कुछ सालों के बाद बहुत अच्छे परिणाम सामने आएंगे। मेडिटेशन को शिक्षा नीति में कंपलसरी कोर्स बना देना चाहिए। 13 वर्ष की उम्र वाले बच्चों से लेकर ग्रेजुएशन के बच्चों तक मेडिटेशन की कक्षा को अनिवार्य कर देना चाहिए। मेडिटेशन की शिक्षा के लिए प्रशिक्षण होने चाहिए।
माता-पिता माता-पिता को घर में ही जब बच्चा बड़ा होने लगता है 12 वर्ष के बाद बच्चे को कम से कम दिन में 24 घंटे में एक घंटा मौन रहने के लिए कहना चाहिए। दिनचर्या में मेडिटेशन को कम से कम एक घंटा के लिए शामिल करना चाहिए जिससे कि व्यक्ति खुद के चित्त को साध पाए।
आने वाले कुछ समय के बाद देश में एक बहुत बड़ा बदलाव आएगा एक परिवर्तन आएगा, क्योंकि मेडिटेशन एक ऐसा रास्ता है एक ऐसा पथ है जिस पर चलने से बच्चे युवा व्यक्ति अपने मन को साध सकते हैं और अपने मन को नियंत्रण में ला सकते हैं मन को नियंत्रण में लाने के कारण वे जीवन के हर क्षेत्र में अपना 100% दे सकते हैं।
जीवन के हर पड़ाव में वे आसानी से पार कर सकते हैं। दैनिक जीवन के रिश्तों में भी अपना हंड्रेड परसेंट दे सकते हैं सिर्फ और सिर्फ मेडिटेशन के कारण। मेडिटेशन को शिक्षा में शामिल करने के बाद हमारे देश में एक बहुत ही रूपांतरित युवा उभर कर सामने आएगा जो आने वाली पीढ़ी के लिए भी उदाहरण बनेगा।.
मेडिटेशन को शिक्षा में शामिल करने के बाद देश में जो सबसे बड़ा परिवर्तन आएगा वह यह है कि देश में कुछ सालों बाद अपराध की संख्या कम होने लग जाएगी।।
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