राधा कृष्ण
राधा द्वारा किए कृष्ण से कुछ सवाल--------
हे कृष्ण !!
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
अधूरा करके मुझको,
क्या खुदको कभी पूरा पाओगे?
तुमने सिखा तो दिया ,
दुनिया को प्यार का सही पाठ!
मगर क्या तुम खुद कभी,
उसको निभा पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
बचपन में वह तेरा मुझे सताना,
मेरी मटकी तोड़ वह चुपके से,
तेरा माखन खाना!
काली अंधियारी रातों में वह पेड़ के नीचे,
तेरा बांसुरी बजाना!
और एक दिन अपनी राधा को,
अकेले छोड़कर जाना!
बचपन से लेकर अब तक किये,
मेरे त्याग समर्पण का,
क्या तुम हिसाब कभी दे पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
दे ना सके जो स्थान कभी मुझको,
क्या रुक्मिणि को वह स्थान,
कभी दे पाओगे?
तुम तो बड़े बेरहम निकले कृष्ण,
कभी मीरा कभी गोपियां तो कभी राधा,
दीवाना करके हमको अधूरा बना दिया!
इतने बरस मेरे बिना बिताकर,
मैं जो मांगू,
क्या मुझे दे पाओगे?
मेरी अंतिम क्षणों में एक बार,
क्या मुझसे मिल पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
राम की सीता जैसे,
शिव जी पार्वती जैसे,
कृष्ण की राधा बनने का अधिकार मुझे,
क्या कभी दे पाओगे?
मेरे दुख पीढ़ा त्याग समर्पण को,
क्या तुम कभी समझ पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
श्री कृष्ण द्वारा दिए गए राधा के सवालों के जवाब-------
हे राधे!!
यह सवाल इतने
कोई जरूरी नहीं
क्योंकि प्रेम ताकत है मेरी
कमजोरी नहीं
जिस दिन से मैंने तुम्हें जाना
उस पल से अब तक खुद को पूरा माना
झांक कर देखोगी अगर ह्रदय मेरा
अपने टूटे अक्स से मेरे दिल को
जोड़ते हुए पाओगी
इससे ज्यादा और क्या दुनिया को
दर्द का मतलब समझाओगी
मैं नहीं भूला तुम्हारे साथ गुजारे
वह बचपन के लम्हे
याद है तुम्हारे द्वारा लिखे
वह प्रेम के नगमे
मुझे सारी उम्र तुम कोसती रहना
इतना अधिकार देता हूं
मगर खुद से कभी मुझे अलग नहीं समझना
इतना कह देता हूं
मैं तुमसे कभी अलग हुआ ही नहीं
आत्मा अपने शरीर से भला अलग है कहीं
जिस दिन आत्मा शरीर से निकल जाएगी
उस दिन यह कहानी खत्म हो जाएगी
जो स्थान मैंने तुम्हें दिया
वह स्थान सदियों तक
कोई किसी को दे नहीं पाएगा
प्रेम हमारा सफल हो जाएगा उस दिन
जुबां पर सभी के जिस दिन
मुझसे पहले तुम्हारा नाम आएगा
देखे बिना अपने किशन को
मीरा अधूरी नहीं
जीने की खातिर कोई
प्रेम इतना जरूरी नहीं
पत्नी का अधिकार पाने से ऊंचा रुतबा
आत्मा की रिश्ते का है
सच्ची मोहब्बत का अंजाम
अगर विवाह होता
तो हर युग में कृष्ण के साथ
नाम राधा का ना जुड़ा होता
काश मैं कभी अपना त्याग समर्पण
तुम्हें समझा पाता
प्रेम सबको आजमाता है
16108 रानियां रखने वाला श्याम
बस एक राधा के लिए तरस जाता है
शायद इसलिए दुनिया का कर्ताधर्ता भी
किसी के दुनिया से चले जाने पर
टूट जाता है
राधा के चले जाने से
कृष्ण भी टूट जाता है
प्रेम सबको आजमाता है
हे कृष्ण !!
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
अधूरा करके मुझको,
क्या खुदको कभी पूरा पाओगे?
तुमने सिखा तो दिया ,
दुनिया को प्यार का सही पाठ!
मगर क्या तुम खुद कभी,
उसको निभा पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
बचपन में वह तेरा मुझे सताना,
मेरी मटकी तोड़ वह चुपके से,
तेरा माखन खाना!
काली अंधियारी रातों में वह पेड़ के नीचे,
तेरा बांसुरी बजाना!
और एक दिन अपनी राधा को,
अकेले छोड़कर जाना!
बचपन से लेकर अब तक किये,
मेरे त्याग समर्पण का,
क्या तुम हिसाब कभी दे पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
दे ना सके जो स्थान कभी मुझको,
क्या रुक्मिणि को वह स्थान,
कभी दे पाओगे?
तुम तो बड़े बेरहम निकले कृष्ण,
कभी मीरा कभी गोपियां तो कभी राधा,
दीवाना करके हमको अधूरा बना दिया!
इतने बरस मेरे बिना बिताकर,
मैं जो मांगू,
क्या मुझे दे पाओगे?
मेरी अंतिम क्षणों में एक बार,
क्या मुझसे मिल पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
राम की सीता जैसे,
शिव जी पार्वती जैसे,
कृष्ण की राधा बनने का अधिकार मुझे,
क्या कभी दे पाओगे?
मेरे दुख पीढ़ा त्याग समर्पण को,
क्या तुम कभी समझ पाओगे?
क्या तुम मेरे सवालों का,
जवाब दे पाओगे?
श्री कृष्ण द्वारा दिए गए राधा के सवालों के जवाब-------
हे राधे!!
यह सवाल इतने
कोई जरूरी नहीं
क्योंकि प्रेम ताकत है मेरी
कमजोरी नहीं
जिस दिन से मैंने तुम्हें जाना
उस पल से अब तक खुद को पूरा माना
झांक कर देखोगी अगर ह्रदय मेरा
अपने टूटे अक्स से मेरे दिल को
जोड़ते हुए पाओगी
इससे ज्यादा और क्या दुनिया को
दर्द का मतलब समझाओगी
मैं नहीं भूला तुम्हारे साथ गुजारे
वह बचपन के लम्हे
याद है तुम्हारे द्वारा लिखे
वह प्रेम के नगमे
मुझे सारी उम्र तुम कोसती रहना
इतना अधिकार देता हूं
मगर खुद से कभी मुझे अलग नहीं समझना
इतना कह देता हूं
मैं तुमसे कभी अलग हुआ ही नहीं
आत्मा अपने शरीर से भला अलग है कहीं
जिस दिन आत्मा शरीर से निकल जाएगी
उस दिन यह कहानी खत्म हो जाएगी
जो स्थान मैंने तुम्हें दिया
वह स्थान सदियों तक
कोई किसी को दे नहीं पाएगा
प्रेम हमारा सफल हो जाएगा उस दिन
जुबां पर सभी के जिस दिन
मुझसे पहले तुम्हारा नाम आएगा
देखे बिना अपने किशन को
मीरा अधूरी नहीं
जीने की खातिर कोई
प्रेम इतना जरूरी नहीं
पत्नी का अधिकार पाने से ऊंचा रुतबा
आत्मा की रिश्ते का है
सच्ची मोहब्बत का अंजाम
अगर विवाह होता
तो हर युग में कृष्ण के साथ
नाम राधा का ना जुड़ा होता
काश मैं कभी अपना त्याग समर्पण
तुम्हें समझा पाता
प्रेम सबको आजमाता है
16108 रानियां रखने वाला श्याम
बस एक राधा के लिए तरस जाता है
शायद इसलिए दुनिया का कर्ताधर्ता भी
किसी के दुनिया से चले जाने पर
टूट जाता है
राधा के चले जाने से
कृष्ण भी टूट जाता है
प्रेम सबको आजमाता है
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