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Showing posts from March, 2019

कौन है वो आखिर

आकर पास मेरे वो चुपके से  कान में धीरे से कुछ कह कर जाता है  देखती हूं जब इधर उधर उसको   तो पल में ही गायब हो जाता है!  कौन है वो आखिर  मेरे करीब आकर इतने   जो हाल ही दूर हो जाता है!! कुछ जानी पहचानी महक सी आती है उसमें कदमों की आहट कुछ पहचानी सी लगती है उसमें यूं तो इस  भीड़ भरी दुनिया में कैसे पहचाने हम किसको मगर औरों से हटकर कुछ अलग बात लगती है उसमें!  वो अक्सर कुछ कहकर जाता है कौन है वो आखिर ? जो औरों के लिए हमेशा कुछ कर जाता है!! पंछी की तरह कभी उड़कर आता है वो देखा है भेदभाव मैंने इंसानों में पर किसी भी डाल पर बैठ जाता है वो! त्याग बलिदान व दया की मूर्ति सा है कौन है वो आखिर ? जो इंसानों में इंसानियत सिखा जाता है!! लोगों की विपदा में उसको  फरिश्ता बनते देखा है, मगर इंसानों की बस्ती में रहकर उसको  इंसान बनते देखा है! वो कभी साथ  छोड़कर नहीं जाता है, कौन है वो आखिर ? जो नादान को नदी के उस छोर तक ले जाता है!! क्या वो कोई कविता है  जिसे लिखा जा सके, है क्या कोई कहानी वो जिसे पढ़ा जा सके! ...

हजारों सालों से पीड़ित लोगों के लिए आरक्षण एक अधिकार

दिनांक 10 अप्रैल 2018 आरक्षण हटाओ आंदोलन में संविधान निर्माता की मूर्ति पर प्रहार किया गया! मूर्ति के सर व पैर हाथों को तोड़ दिया गया! उनके वेशभूषा कर रंग भगवा रंग कर दिया गया ! यह एक कपड़ों में परिवर्तन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक परिवर्तन दिखाई देता है!  आरक्षण पूरे देश का बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है ! आरक्षण की व्यवस्था को बनाने के पीछे कुछ मुख्य कारण रहे हैं! आरक्षण बाकी पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाने के लिए रखा गया था, समानता लाने के लिए रखा गया था! यह व्यवस्था पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाने के लिए रखी गई ,पर आज तक बहुत सारे लोग पिछड़े जाति के ऐसे हैं जो आरक्षण का उपयोग तक नहीं कर पाते हैं ! क्योंकि वे जागरूक ही नहीं है ,उनके पास धन नहीं है, संसाधनों की कमी है , वह आरक्षण के फायदों से जागरूक ही नहीं है! आरक्षण को लेकर संविधान सभा की बहस में डॉक्टर अंबेडकर के कोई भी सहमत में नहीं था! बाबा साहेब ने देश में सामाजिक धार्मिक पारंपरिक भारत पीड़ितों से शिकार लोगों के लिए लोकतांत्रिक पिता जब तक दिया किसी के पास उसका ठोस प्रतिकार नहीं था! उदाहरण के लिए एक परिवार में 2 सदस्य हैं एक बालक ...

, self composed song ४४४

होठों की हंसी बन गए जब से देखा तो मेरी जान मेरी  तुम मेरी जीने की वजह बन गई दिल की खुशी बन गए जब से चाहा तुम्हें  बस तेरे ही होकर रह गए वो तेरा मेरी बातों पे यूं जोर से हंसना वो तेरा मुझे देख कर यूं मुस्कुराना वो तेरा मुझे दुखी देख ही यूं  सहम जाना कैसे भूले जब चाहा तुम्हें भूल तो  तेरी यादों में ही  खोकर रह गये वो तेरा मुझे यूं आसानी से छोड़कर जाना वो तेरा मुझे यूं बेदर्दी से रुलाना वो तेरा मेरे पास लौट कर ना आना कैसे भूले जब से जाना तुम्हें तो बस तुम्ही में सिमट कर रह गए

कब से बैठा है तू अब मान भी जा जरा

कब से रूठा बैठा है तू, अब मान भी जा जरा, कब से मुझसे खफा है तू, थोड़ा मुस्कुरा दे अब जरा! चांद की तरह रोशन रहता है तू मेरे दिल में, मैं कितना बेबस हूं जान मेरी अब देख तो जरा! मेरे रहनुमा रिश्ता है बड़ा तेरा और मेरा, तू ना रहे खफा पहले से तू हो चुका है मेरा!! इस बंजर दिल में बसते हो तुम, इन तन्हा ख्वाबों में रोज आते हो तुम! मैं आना तो चाहूं तेरे पास मगर, एक बार तू आकर मेरे पास मेरा हाल जान ले जरा! मेरे रहनुमा रिश्ता है बड़ा तेरा और मेरा, तू ना रहे खफा  पहले से तू हो चुका है मेरा!! इस बेबस दिल की धड़कन हो तुम, इस बेनाम जिंदगी की जरूरत हो तुम, खुदा से भी छीना था तुझको मैंने, फिर मुझे छोड़ते वक्त तुझे मेरा ख्याल तो आया होगा जरा!!

सेल्फ कंपोज्ड शायरियां

तुझसे मोहब्बत करने का गुनाह जब हम कर बैठे तुझे हंसता देख दिल से बड़ा खुश हो लेते ख्वाहिश बन कर आई थी तू मेरी राहों में तुझे खोने से पहले काश तेरे चेहरे को जरा पढ़ लेते आया तो था तेरी दुनिया को जन्नत बनाने मेरी सांसो को मैंने कभी गौर से महसूस नहीं किया! आंखें खुली तो देखा  वो  मरने से पहले आई थी अपनी बीती दास्तां बताने! खिलते हैं फूल वहां मोहब्बत होती है जहां महकती है खुशबू वहां महफिल सजती है जहां! दिल से निकली तो बद्दुआ भी पवित्र होती है! हर दुआ पूरी होती है सच्ची चाहत होती है जहां! बरसों पहले आया था कोई एक ख्वाब बनकर बड़े इत्मीनान से अपनी जिंदगी बनाया था उसको! एक अजीब सी कशमकश थी उसमें आज आई है मेरे पास खुद चलकर इतनी मुश्किलों से जीने की वजह बनाया था जिसको! बैठा है वह अकेला मेरे इंतजार में खोया है वो हमारी चाहत के दीदार में! मैंने बहुत कहा चली जा अकेला छोड़कर मुझे यहां किसी को मंजूर नहीं हमारा साथ होश आया तो पता चला खुदा ने भी बनाया था मेरे लिए तुझे इस संसार में! शायराना बन कर आए थे तेरे दर पर हम दीवाने बाजुओं में जो तेरे गुजारे वो पल  थे...

मेरे रहनुमा जीयुं कैसे अब तेरे बिना

मेरे रहनुमा जियुं कैसे अब तेरे बिना, खामोशी के लिए उन अनजान राहों में , क्या किया तूने मेरे बिना, बता दे जरा तू दिलबर मेरे! ये नहीं सोचा कि कोई नहीं, मेरा यहां तेरे सिवा, बरसों बीत गए अकेले तन्हा यहां, तेरी राह तकते तकते ज़ख्म मिले जहां! तुझको सवार कर रखा अपने दिल में, जहां देखो दुख भरा आलम था वहां, क्या किया तूने मेरे बिना बता दे तू दिलबर मेरे! एक नई दास्तान लेकर लौटा है वो आज आज भी मेरे बिना आज भी मेरे बिना बेचैन है वो, चला गया था जब कहीं दूर तू अकेले! चीरकर नफरत की दीवारों को, एक बार फिर से अपनी दस्तक दे गया तू!!

जब से तू मेरी जिंदगी में आया

जब से तू मेरी जिंदगी में आया, खुदा ने एक ऐसा ख्वाब दिखाया, मुस्कुराते मुस्कुराते चले जाते हैं वो, हंसते हंसते भी गम को पी जाते हैं वो, हमने मिलकर एक सपना सजाया, हर दम वह मेरे साथ था फिर धूप हो या छाया!! उन खिले फूलों में नजर आते हैं वो, फैल जाती है खुशबू वहां, जिन गलियों से गुजर जाते हैं वो, उस चांदनी से रोशन चांद में तेरा चेहरा नजर आया! तुझ से लड़ कर झगड़ कर भी तुझे भूल ना पाया!! मेरे हर गम में साथ था वो, मेरी हर खुशी में साथ है वो, एक तूफान ख्वाहिशों में बहुत रुकावटें लेकर आया! फिर भी खुदा तक हमको मिलने से रोक नहीं पाया!!

ये कैसी आशिकी सेल्फ कंपोज्ड सोंग ३

जो भी देखे तुझे सोचता होगा, कहां से आई है तू, दूर से ही देख कर तुझे, खुदा भी मुस्कुराता होगा! जब से देखा तुझे, एक पल भी चैन नहीं मुझे, जब निकलती होगी तू रातों में, चांद भी खुद को तू समझता होगा!! जलती है तू उन अंधेरी गलियों में शमा बनकर, जहां से एक परिंदा तक नहीं गुजरता होगा! मोहब्बत अगर किसी ने नहीं देखी, तू कोई आकर तो देखे तुझे, खुदा भी तेरे दिल में दस्तक हर सुबह शाम देता होगा!!

ये कैसी आशिकी सेल्फ कंपोज्ड सॉन्ग २

तू है आदत मेरी तू ही है आशिकी, तुझको चाहूं हर दम तुझमे ही मैं रहूं! तुझ से शुरू हर दास्तान तुझ से खत्म हर कहानी, तेरे साथ चलूं तेरे साथ रहूं यही है जिंदगानी!! तू है आदत मेरी तू ही है आशिकी, तेरे साथ देखा था एक सपना, मोहब्बत की राहों से तक , जिन पर से तू गुजरा करता था, प्यार से सजाया था एक आशियाना! एक पल में ही था जो ढह गया, आंखों में बसा लूं तुझको दिल में छुपा लूं तुझको, तू ही है हसरत मेरी तू ही है आशिकी!! , तू ही अमानत है मेरी तू ही है आशिकी, तुझको पर हूं तेरे साथ शाम गुजारूं! तुझसे शुरु मेरी जिंदगी तुझ से खत्म मेरा जहां, तेरी आंखें तेरी यादें तेरे साथ गुजारा वो हर पल, भूलकर भी भूलने ना देगी तेरी ये आशिकी, तू  है आदत मेरी तू ही है आशिकी!! तू ही जन्नत है मेरी तू ही है आशिकी, तू गया इस कदर कभी छोड़कर मुझे, कि मर कर जी रहा था उन राहों पर अकेले! तेरे साथ हर लम्हा जिया था , तेरे साथ ही मिट गई मेरी जिंदगी, तू है आदत मेरी तू ही है आशिकी!!

ये कैसी आशिकी सेल्फ कंपोज्ड सॉन्ग

आप आए इस कदर हमारी राहों में, मीलों फासले थे फिर भी दरमियां! कैसा वह वक्त था कैसा वो जहां था, चाहत थी तू मेरी और एक अधूरा सपना, अपनी दुनिया उजाड़ कर सुनसान बना दिया मेरे संसार को, तू कैसा हमनवाब था जो आता था मेरे ख्वाबों में!! फूलों की जैसे महकता था वो, जुगनू की तरह चमकता था वो ! पास आते आते मेरे वो मुझसे दूर हो गया, तू कैसा हमनशी था जो रहता था मेरे खयालों में!! मिट्टी की रेट की तरह वो फैला था मेरे जिस्म में, बारिश की बूंदों की तरह डूबा था मेरे इश्क में! मेरी राहों को सजाते सजाते वो खुद की राहों में कहीं खो गया, तू कैसा हमदर्द था जो दर्द सहता था मेरे दर्द में!! पहाड़ों की शांति में अब दिखता है वो, हजारों तारों में अब चमकता है वो! मुझे चाहते चाहते एक दिन वो खुद में मर गया, तू कैसा हमसफर था  जो आ न सका कभी मेरे जीवन में!!

बेबसी सेल्फ कंपोज्ड सॉन्ग

क्यों आया था तू मेरी जिंदगी में, मुझको देखकर सब तूने खुद को खो दिया, ऐसी क्या जरूरत थी कि मुझ में तू मैं हो गया! बेफिक्र था मैं आज बेसब्र हूं, जिसने भी खुशी वही गम देकर चला गया, ऐसी वह हसरतें थी तेरे बिना मैं अधूरा हो गया! तुझे देख कर रात गुजारूं इतनी सी तमन्ना थी मेरी, एक तूफान मुझे मुझसे तुझे छीन ले गया! ऐसी मन्नतें थी मेरी मुझे जिंदगी देकर तू मेरी सांसे ले गया, वहां बैठा देख रहा था खुदा मेरी जान का वह सब कुछ लूट ले गया!!

ब्रह्मांड में आदमी की हैसियतsak

मेरा विषय किसी जाति धर्म नस्ल समुदाय संप्रदाय तथा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं है, बस कुछ अपने विचार रखना चाहती हूं. बहुत लोगों को अक्सर कहते सुना है ,ऊपर तक मेरी पहुंच है, इतनी मेरी हैसियत है ,मेरे सामने तेरी क्या औकात है, बहुत लोगों को मैंने अपनी जाति धर्म वह वर्ग पर घमंड करते देखा है, यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि मैंने लोगों को कहते सुना है जो अपने किसी जाति विशेष को संबोधित कर घमंड प्रदर्शित करता है. पर मेरा मानना यह है अपनी जाति धर्म वर्ग ऐसी कोई वस्तु पर क्या अहंकार करना   जो हमें दूसरों से प्राप्त हो, उस वस्तु पर क्या घमंड करना जो हमें किसी और से मिली हो, किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि इंसान जन्म तो अकेले होता है पर दुनिया में आकर वह कई सारी जंजीरों  में बंध जाता है. जाति व धर्म किसी भी व्यक्ति को दूसरों से मिला है, जब व्यक्ति पैदा होता है उसको नहीं पता होता कि वह किस जाति से है किस धर्म से है, फिर भी दुनिया में आने के बाद उसको न जाने कितने धर्म कितने जातियों के साथ बांध दिया जाता है. जाति और धर्म को प्राप्त करने में मनुष्य ने कोई मेहनत नहीं की ये ...

नारी ही हमारे भारत जैसे देश को बदल सकती है मगर हमारा आधा भारत किचन में खाना बनाता है

जिस नारी सशक्तिकरण की हम बात करते हैं असल में उसकी शुरुआत मनुस्मृति नमक हिन्दू ग्रंथ के सहन से होती है. जो भारतीय नारी के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना थी. जिस मनुस्मृति में यह लिखा था कि स्त्री सिर्फ लैंगिक संबंधों के लिए बनी है, वह दिनरात मुक्त नहीं रह सकती, स्त्री को स्वतन्त्र रहने का अधिकार नहीं है. हिन्दू कोड बिल भी नारी के जीवन के इतिहास की एक स्मरणीय घटना है. ये दोनों घटनाएँ नारी के जीवन के इतिहास की महत्वपूर्ण तथा स्मरणीय घटना रही हैं. जिनसे उनके जीवन में बहुत बदलाव आया. अन्यथा आज के समय मे नारी मात्र एक संतानोत्पत्ति का साधन बनकर रह जाती. सिर्फ रसोई तक सीमित रहती. अपना सारा जीवन बच्चों को पालने और पति सास ससुर की सेवा मे निकाल देती. नारी का जीवन तबतक स्वतंत्र नहीं है जब तक वो आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, जा तक वह आत्मनिर्भरता को प्राप्त नहीं कर लेती. नारी का जीवन किसी और का जीवन नहीं है वह उसका निजी जीवन है, जैसे चाहे वह उसे वैसे जी सकती है. एक नारी जितना सहनशील नर नहीं हो सकता. अगर गहराई से देखा जाए तो नारी के बचपन से जवानी तक जवानी  से विवाह तक विवाह से उसके जीवन के अंत तक व...

Why Ambedkar remained only a controversy in our democratic country

It is my experience Wherever I have gone, I have always been observed, why reservation is a big controversy in our country (India )while it is not only in India but also in America as well as in other countries. Actually Ambedkar himself remains a big controversy in our democratic India. यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि वर्तमान समय में  अंबेडकर जैसे महान हस्ती की फोटो सिर्फ दलितों तथा पिछड़ों के घरों में पाई जाती है सवर्णों के घरों में कभी नहीं देखी जा सकती, अगर कोई ऊंची जाति का व्यक्ति अंबेडकर का नाम क्यों ना लेने लगे या उनके बारे में सकारात्मक बातें करने लगे तो यह हमारे समाज में एक बहुत बड़ी बात हो जाती है यह स्थिति है हमारे देश में! ऐसा करते हैं इतिहास को एक बार फिर से दोहरा देते हैं आज से हजार साल पुराना जो इतिहास पिछड़ी जातियों का था वह आज सवर्ण लोगों का कर देते हैं, और आज से हजार साल पहले का जो इतिहास सवर्ण लोग का था वह आज पिछड़ी जातियों का कर देते हैं, now see where is discrimination? why need reservation? then what will they do if they replaced by The deprived people ...

यह देश अब तक गुलाम है ना जाने कितने जमानों से

कहां छुपकर बैठे हो  मेरे देश के जवानों चार दीवारों से निकल और देख ये देश अबतक गुलाम है  ना जाने कितने ज़मानो से!! तू अंधा बहरा और अपाहिज तो है ही जल्द ही गूंगा भी हो जाएगा जब तेरा देश तेरी  आँखों के सामने बर्बाद हो जाएगा! कहां छुपकर बैठे हो  मेरे देश के जवानों चार - - - - - - - - - - - - - - - - ज़मानो से!! ये देश अबतक गुलाम है  ना जाने कितने ज़मानो से-2 कितनी सच्चाई है इस तर्क में आज मेरा जवाब है  मेरे खुद के सवालों से हाँ ये देश अबतक गुलाम है  ना जाने कितने ज़मानो से! कहां छुपकर बैठे-------------------ज़मानो से!! कौन है वो शख्स अखिर  जिक्र से जिनके जिस्म मे  हलचल मच जाती है मेरा पैगाम है आज  मेरे देश के जवानों से तू कुछ कर या ना कर,  पर तू कर जाना देश के लिए अपने कुछ जज़्बातों से! राख का हर एक कण  मेरी गर्मी से गतिमान है  मैं एक ऐसा पागल हूं  जो जेल में भी आजाद है इतिहास वो नहीं जो लिखा गया इतिहास वो है जो नहीं लिखा गया कुछ प्रतिज्ञा उन्होंने ली थी कल कुछ प्रतिज्ञा आज तुम लेलो मिट गए थ...

आदमी तेरी कितनी औकात है

अक्सर मैंने लोगों को छोटी छोटी बातों पर ये बोलते सुना है कि, तू मुझे बाहर मिल तेरी औकात बताता हूँ, तेरी औकात क्या है मेरे आगे, तू है कौन मेरे आगे क्या औकात है तेरी, तो मेरे उन भाइयो और बहनो के लिए मेरी इस कविता के माध्यम से एक संदेश है, कि इस पूरे ब्रह्मांड मे जितने भी प्राणी हैं वो सभी की खुद मे एक महत्ता है, देखा जाए तो इस पूरे ब्रह्मांड मे आदमी की कोई औकात नहीं है., और समाज के कुछ रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोगों के लिए भी यह कविता मैंने लिखी. आदमी तेरी कितनी औकात है! है तेरे पास बंगला गाड़ी कार, पर भिखारी को एक टका तक देने में तू कर देता इंकार, बता आदमी तेरी कितनी औकात है!! करता है तू पत्थर पूजा दिए जलाता सुबह शाम पर गरीब को ना दिया सहारा जाकर देख जो पड़े हैं सड़कों पर सरेआम! बता आदमी तेरी कितनी औकात है!! बेटियों से तू कहता मत करना हमारी इज़्ज़त के साथ मज़ाक पर बेटों को क्यों नहीं बताता मत कर किसी के घर की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ बेटियों से कहता हरदम ये करो वो करो कहा होता अगर यही बेटों को तो ना करता कोई बेटा किसी बेटी का अपमान! बता आदमी तेरी कितनी औकात है!! जि...

Hellucianate self composed story song lyrics

. तू मुझे छोड़कर जब दूर कहीं चला जाएगा, फिर भी मुझे तुम मुझ में नजर आएगा! करले कोशिशें खुद खुदा तुझे मुझसे दूर करने की, मीलों दूर जाकर भी तू मेरे पास लौट आएगा!! जब तू अकेला था मैं खुद में कहीं खोया था, जब मैं अकेला हूं तो तू कहीं खो गया, जिंदा नहीं तो क्या हुआ तेरा साया ही मेरी रूह है! तू कभी अकेला नहीं  जन्नत को भी छोड़ कर तेरे पास चला आऊंगा!! कभी तू मेरे बिना बेहाल था आज मैं तेरे बिना इस हाल में हूं, तेरे साथ मेरी दुनिया जन्नत सी थी  तेरे कदमों में मेरी दुनिया सजी थी! टूट गए सारे सपने बिखर गया हमारा जहां, देने एक नई जिंदगी तुझ को  खुद खुदा यहां चला आएगा!!

हां मैंने भी एक ख्वाब देखा है

हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है जिंदगी और मौत से लड़ते मैंने एक जान को देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!! पत्थर पर चढ़ते भोग और एक रोटी को तड़पते इंसान को देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!! वैसे तो हम भी जीवन से खुश नहीं पर हमारे जैसे जीवन का उनका मैंने एक अरमान देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!! महलों में रहते उनकी जिद्द पूरी होते पर गरीबों के मिटते मैंने उनके जज़्बात को देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!! सच कहा है किसीने गरीब का कोई दोस्त नहीं होता पर उसको सहारा देने वाले इंसानी रूप मे मैने उस भगवान को देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!! बहुत शांति की दुनिया होती है उनकी ना पार्टी की चिंता ना कोई भ्रमण बस एक रोटी का खयाल होता है सर्दी मे ठिठुरते गर्मी में तपते मैंने उनके संसार को देखा है! हाँ मैंने भी एक ख्वाब देखा है!!

मेरी आखिरी बातों को काश कोई सुनने वाला होता

मेरी आखिरी बातों को, काश कोई सुनने वाला होता! रोता देख हंसाने, तो कोई रूठ कर मनाने वाला होता! मेरे आयने से वो खुद को देखता, मेरे बहते अश्कों में चेहरा तेरा होता, मेरे होठों की हंसी देख, काश कोई मुस्कुराने वाला होता! वो होता तो उसे देख सुकून मुझे मिलता, ना है वो तो मुझे ख्वाबों में है मिलता! अपनी बाज़ुओं में मुझे, काश कोई महफूज रखने वाला होता! उस दिल की आंखों से तेरा चेहरा पढ़ लेती हूं, छाई ख़ामोशी में तेरी मायूसी पढ़ लेती हूं, मेरी आंखों से तुझे, काश कोई देखने वाला होता! देख नहीं सकती उन खूबसूरत लम्हों को, वो लम्हे मुझे काश कोई दिखाने वाला होता! नहीं जानती चाहत के मायने, गुज़र रही है जिंदगी एक बुझी शमा में, उस शमा को काश कोई जलाने वाला होता! कब से खड़ी हूं उस शख्स की राह में, पलके बिछाए बस उस की चाह में, काश कोई शख्स मुझे चाहने वाला होता! यादों में बस फ़िक्र उसकी, बातों में बस जिक्र उसका, मिली खुशी उसे अगर मुझे अश्क देने में, तो मेरे अश्कों को काश कोई पोंछने वाला ना होता! मेरा मिलना था उस से महज इत्तेफाक अगर, हर दम वह मुझसे मिला ना होता! खुदा ने अ...

मैंने अपनी जिंदगी को कुछ यूं ही आसान बना लिया

मैंने अपनी जिंदगी को, कुछ यूं ही आसान बना लिया! कभी किसी को माफी दे दी, कभी किसी को माफ कर दिया! रिश्ते परखना तो सब जानते हैं,  पर रिश्ते निभाना कोई नहीं जानता! शोलों से तप कर खुद को,  कुछ यूं ही मजबूत बना लिया, कभी किसी को तन्हाई देदी, कभी खुद को तन्हा बना लिया! हूं मैं दूर सभी दिखावों से, ऐसे लोग दिल जीता करते हैं, करता हूं मैं कर्म पूजा, भले ही लोग पत्थर को पूजा करते हैं! अपनों को खो कर मैंने खुद को, कुछ यूं ही पत्थर बना लिया, कभी किसी को आंसू दे दिए, कभी खुद को आंसुओं में भिगो दिया! अनुभवों से मैंने  जिंदगी को, कुछ यूं ही महान बना लिया! कभी अपनों को जिंदगी जीना सिखा दिया, कभी जिंदगी ने अपनों के बिना जीना सिखा दिया! मैंने अपनी जिंदगी को कुछ, यूं ही आसान बना लिया ! कभी किसी को माफी दे दी, कभी किसी को माफ कर दिया!!

मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है

मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है! मोड़ लेते हैं अक्सर पीछे कदम जो लोग, उन राहों से मैंने गुजरना सीखा है! मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सिखा है!! सुनता है जो हजारों की, वह कमजोर नहीं बड़ा दिल वाला होता है! पर मैंने अक्सर शांत इंसान को, नाम कमाते देखा है! मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है!! सोचते हैं जो लोग, झुकना नीचता की निशानी है! पर मैंने मेरे भगवान से, झुकना सीखा है! मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है!! बहुत है ऐसे लोग, जो अपनों को समझते हैं सिर्फ अपना! पर मैंने हर बेगाने को, अपना बनाना सीखा है! मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है!! कर सकती अगर मैं पार उस समंदर को, तू खुद को उससे भिगाने से बच जाती! पर मैंने उस समंदर के पीर को, समझना सीखा है! मैं नहीं जानती लोग क्या कहेंगे, पर मैंने आगे बढ़ना सीखा है!! कहते हैं जो मां बाप, बेटी फोन लेकर क्या करेगी, पर मैंने उनके बेटों को अक्सर, फोन मिस यूज कर...

हौंसले

नहीं ऊंची ऐसी चोटी, जो हौसले को हिला सके! नहीं अटल ऐसी आंधी, जो रास्ते से हटा सके! नहीं सपने कांच के टुकड़े, जो गिरकर टूट जाए! नहीं इरादे कमजोर इतने, की मुश्किलों से डर जाए! चट्टानों से टकरा टकरा कर, सीने को है फौलाद बनाया! तूफानों में ठोकर खाकर, कदमों को है आगे बढ़ाया! रंग लहू का लाल गुलाब सा, दहक अंगारों सी है! दिल मिट्टी का है, मगर अरमां सितारों की है! नहीं है ऐसी फितरत, जो मौके पर डगमगा जाए! नहीं है ऐसी आदत, जो बीच राह में छोड़ जाए! सोच से ही तू उठा है, सोच से ही तू गिरा है, छोटा सोचने वाले लोग, जरा तू एक बार सोच, छोटा इतना सोच सोच कर, हर रोज तू कितना गिरा है! गली मोहल्ला शहर , देश दुनिया में, हर एक इंसान व्यस्त है, एक दूसरे की तुलना में, पर ए नादान, तू खुद को एक बार पहचान जरा, जो तू है वह सिर्फ तू है! नहीं है ऐसी कोई हस्ती, जो तेरी हस्ती मिटा सके! नहीं ऊंंची ऐसी चोटी, जो हौंसले को हिला सके! नहीं अटल ऐसी आंधी, जो रास्ते से हटा सके!!

मैं फिर भी तुमको चाहूंगी (सेल्फ कंपोज्ड सॉन्ग)

जब से है जाना तुम्हें मैंने, दर्द से दामन भीग गया, भीड़ में तो मिलते हैं बहुत, मैंने तो बस तुम्हें माना है, है जुनून मुझे बस तेरा, है उम्मीद तुम्हें पाने की, चाहा तो बहुत तुम्हें छोड़ भी दो, दर्द है इतना कि दिल तोड़ भी दूं, हाथों में लेके हाथ तेरा, मैं हरदम साथ निभाऊंगी! मैं फिर भी तुमको चाहूंगी मैं फिर भी तुमको चाहूंगी इस चाहत में मर जाऊंगी मैं फिर भी तुमको चाहूंगी!!

शायरी

अगर कभी छोड़ दूं मैं यह संसार, तो मेरी तस्वीर से कुछ बातें कर लेना, अगर मेरी तस्वीर ना हो तो, उड़ती हवा के संग कुछ पल बिता लेना! तराशेंगे लोग मेरी कब्र में तेरी मोहब्बत को, इस कदर मेरी रूह  से तू मोहब्बत कर लेना! न तू राजा ,ना मैं तेरी रानी हूं बिन तेरे ना मुझे जीना है, बिन मेरे ना तुझे जीना है, बस इतनी सी हमारी कहानी है! तू पानी है ,और मैं जल की रानी है, जो साथ रहे तो वही जिंदगानी है! जो हुए जुदा तो खत्म हमारी कहानी है!

तेरे नाम 2 (स्क्रिप्ट)

28 साल की मीरा एक छोटे से गांव में रहती थी!  12 साल की उम्र में उसकी मां का देहांत हो गया ,और उसके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया ,और मीरा को घर से बाहर निकाल दिया ,क्योंकि वह अपनी पहली पत्नी से प्यार नहीं करता था ,ना ही उससे हुई संतान मीरा से प्यार करता था! 12 साल की उम्र से ही मीरा ने बाहर काम करना शुरू कर दिया था! अब वह 8 साल काम करे हो गया है, मीरा एक पागलखाने में पागल और मानसिक असंतुलित लोगों का ध्यान रखती है और दवाई देना उसका काम है, जिसकी उसको तनखा मिलती है!मीरा20 साल की हो गई ,उस वक्त 1 दिन एक लड़का जो 23 साल का है ,उसका मानसिक संतुलन ठीक ना होने के कारण उस लड़के को पागलखाने में रखा जाता है! मीरा उस लड़के का वैसे ही ध्यान रखती है, जैसे सभी मरीजों का ध्यान रखती है! कुछ महीने बीत जाते हैं ,लगभग 2 साल बीत जाते हैं, मीरा के दिमाग में एक दिन यह सवाल उठता है, कि वह लड़का रोहन जिसे पागलखाने लाया गया था, उसको डेढ़ साल हो गया ,पर आज तक कभी भी रोहन के घर वालों में से कोई भी उससे कभी मिलने नहीं आता! वह इस बात से विचलित होती है, और इस बारे में पागल खाने के प्रमुख लोग बाहर से पूछताछ करती ...

जाने क्यों जब तुझे देखूं मेरा दिल तेरी ओर चलता है

जाने क्यों जब तुझे देखूं मेरा दिल तेरी ओर चलता है जाने क्यों ये आंखें मेरी तुझे देखने को मचलती हैं!! तू जब पास होती है हर कमी पूरी लगती है तू मेरे आयने से  मुझे देख मेरी कहानी अधूरी सी लगती है!! जाने क्यों तेरी ओर अगर रुक मोटू तेरी सांसों पर तेरा जोर चलता है जाने क्यों जब तुझे देखूं मेरा दिल तेरी ओर चलता है!! कलियों से खिलना चाहती है तू इनकार कर भी दे अगर तेरे साथ ही रहना चाहती है जाने क्यों जब तुझे सोचू मेरी खामोशी में तू हर पल रहता है!! तू साथ है तो लव मेरे अल्फाज़ो से तक मुस्कुराते हैं जाने क्यों जब तुझे चाहूं मेरा दिल धड़कने सा लगता है!! जाने क्यों जब तुझे देखूं मेरा दिल तेरी ओर चलता है जाने क्यों दिल में मेरे बस तेरा ख्याल रहता है जाने क्यों यह कहानी मेरी कुछ अधूरी सी लगती है!!

भारत की राजनीतिक परिस्थितियां

संविधान के अनुसार भारत एक प्रधान समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राज्य है जहां पर सरकार जनता के द्वारा चुनी जाती है आज मैं एक ऐसे देश की राजनीतिक परिस्थिति लिख रही हूं जहां 125 करोड़ लगभग जनसंख्या है कई तरह की धर्म कई तरह के समाज कई तरह की संस्कृति अधिक है जहां आएं हैं शब्दों में लिखना मैं कोशिश करती हूं हम पश्चिम की नकल करने में लगे हैं हमारा अपना वजूद नहीं है भारत का भविष्य आज ऐसे लोगों के हाथ में है राजनीति के मायने क्या होते उनको पता ही नहीं अच्छे प्रशासक हो सकते हैं परंतु देश व समाज सुधारक नहीं हो सकते हैं जैसे कि इतिहास में कई राजनेता रहे हैं!