हौंसले
नहीं ऊंची ऐसी चोटी,
जो हौसले को हिला सके!
नहीं अटल ऐसी आंधी,
जो रास्ते से हटा सके!
नहीं सपने कांच के टुकड़े,
जो गिरकर टूट जाए!
नहीं इरादे कमजोर इतने,
की मुश्किलों से डर जाए!
चट्टानों से टकरा टकरा कर,
सीने को है फौलाद बनाया!
तूफानों में ठोकर खाकर,
कदमों को है आगे बढ़ाया!
रंग लहू का लाल गुलाब सा,
दहक अंगारों सी है!
दिल मिट्टी का है,
मगर अरमां सितारों की है!
नहीं है ऐसी फितरत,
जो मौके पर डगमगा जाए!
नहीं है ऐसी आदत,
जो बीच राह में छोड़ जाए!
सोच से ही तू उठा है,
सोच से ही तू गिरा है,
छोटा सोचने वाले लोग,
जरा तू एक बार सोच,
छोटा इतना सोच सोच कर,
हर रोज तू कितना गिरा है!
गली मोहल्ला शहर ,
देश दुनिया में,
हर एक इंसान व्यस्त है,
एक दूसरे की तुलना में,
पर ए नादान,
तू खुद को एक बार पहचान जरा,
जो तू है वह सिर्फ तू है!
नहीं है ऐसी कोई हस्ती,
जो तेरी हस्ती मिटा सके!
नहीं ऊंंची ऐसी चोटी,
जो हौंसले को हिला सके!
नहीं अटल ऐसी आंधी,
जो रास्ते से हटा सके!!
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