तेरे नाम 2 (स्क्रिप्ट)
28 साल की मीरा एक छोटे से गांव में रहती थी! 12 साल की उम्र में उसकी मां का देहांत हो गया ,और उसके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया ,और मीरा को घर से बाहर निकाल दिया ,क्योंकि वह अपनी पहली पत्नी से प्यार नहीं करता था ,ना ही उससे हुई संतान मीरा से प्यार करता था! 12 साल की उम्र से ही मीरा ने बाहर काम करना शुरू कर दिया था! अब वह 8 साल काम करे हो गया है, मीरा एक पागलखाने में पागल और मानसिक असंतुलित लोगों का ध्यान रखती है और दवाई देना उसका काम है, जिसकी उसको तनखा मिलती है!मीरा20 साल की हो गई ,उस वक्त 1 दिन एक लड़का जो 23 साल का है ,उसका मानसिक संतुलन ठीक ना होने के कारण उस लड़के को पागलखाने में रखा जाता है! मीरा उस लड़के का वैसे ही ध्यान रखती है, जैसे सभी मरीजों का ध्यान रखती है! कुछ महीने बीत जाते हैं ,लगभग 2 साल बीत जाते हैं, मीरा के दिमाग में एक दिन यह सवाल उठता है, कि वह लड़का रोहन जिसे पागलखाने लाया गया था, उसको डेढ़ साल हो गया ,पर आज तक कभी भी रोहन के घर वालों में से कोई भी उससे कभी मिलने नहीं आता! वह इस बात से विचलित होती है, और इस बारे में पागल खाने के प्रमुख लोग बाहर से पूछताछ करती है ,तो उसको रोहन की कहानी के बारे में पता चलता है, मीरा को पता चलता है ,रोहन को 2 साल पहले कामिनी नाम की युवती से प्यार हो गया था ,जिससे उसने शादी कर ली थी ,लेकिन वह लड़की ने धोखेबाजी से शादी की थी रोहन की जायदाद पैसों के लिए शादी की थी! रोहन को जब इस बारे में पता चलता है ,तो रोहन कामिनी को इस धोखेबाजी के लिए उसे थप्पड़ मारता है ,और इस थप्पड़ की कीमत बहुत बड़ी चुकानी पड़ती है ! कामिनी का भाई और बाप दोनों ही मशहूर गुंडे होते हैं, जो रोहन की आंखों के सामने उसके मां बाप को मार देते हैं ,रोहन बचाने की कोशिश करता है ,तो कामिनी और उसका भाई मिलकर रोहन के सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर देते हैं ,और वहां से चले जाते हैं! किस्मत से रोहन अकेला बच जाता है, पर वह अपने पूरे परिवार को खो देता है! आज भी कामिनी और उसका बाप भाई रोहन की तलाश कर रहे हैं, ताकि अगर वह जिंदा हुआ तो पुलिस के आगे अपना मुंह ना खोल दे !मीरा को इस प्रकार पता चलता है, कि रोहन का इस दुनिया में कोई नहीं है ,वह अकेला है, वह बेहोशी की हालत में सड़क पर खून से लथपथ डला मिला था, लोग उसे अस्पताल ले गए, उसे पागल घोषित कर पागल खाने में डलवा दिया गया! रोहन की कहानी सुनकर मीरा की आंख में आंसू आ जाता है, वह उस दिन एक बात ठान लेती है ,और जीवन का लक्ष्य बना लेती है, कि उसे रोहन को पागलखाने से निकाल कर बाहर जाकर कहीं घर में रख कर उसकी देखभाल करनी है, 1 दिन ठीक करना है ,एक दिन मीरा रोहन को चुपके से अपने साथ पागलखाने से बाहर ले जाती है ,क्योंकि पागल खाने से किसी व्यक्ति को ले जाने की इजाजत नहीं होती है! अपनी नौकरी छोड़ देती है, और एक घर जो उसने ले रखा था रोहन को वही रखती है, तथा घर में ही सिलाई का काम करके अपना जीवन यापन करती है! मीरा का जीवन का लक्ष्य रोहन को स्वास्थ्य से ठीक करना और वापस खुशियां लाना था! मीरा रोज रोहन का खाने-पीने का, दवाई खिलाने का, उसके कपड़े धोना ,कपड़े बदलना ,हर एक प्राइवेट काम करना, वह सारी सेवा करती है ! फिर कुछ दिनों में रोहन बच्चों की तरह मीरा को दोस्त मानने लगता है ! मीरा हंसने खेलने में सारा वक़्त रोहन का मनोरंजन करने में निकालती है ! मीरा रोहन को घुमाने ले जाती है ,साथ में सब सेवा करती है! 5 साल बीत जाते हैं, यह करते करते पर रोहन पागल ही रहता है, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा ही रहता है, बहुत डॉक्टर को दिखाती पर सही नहीं होता , फिर उसे 1 दिन कोई यह सलाह देता है, कि मीरा को रोहन को विदेश ले जाकर उसका इलाज करना चाहिए! मीरा बहुत मेहनत से पैसे कमाती है! उसकी लिखी एक किताब छपती है !जिसका उसे बहुत पैसा मिलता है! और वह पैसा रोहन को विदेश ले जाने में और उसका इलाज कराने में लगाती है ! वह विदेश में है ,रोहन का इलाज चलता है ,और डॉक्टर के कहने के मुताबिक रोहन कुछ महीनों में ठीक होने लगता है! रोहन को मीरा से बहुत लगाव हो चुका होता है! जैसे घर में किसी बच्चे को होता है ,और यह जाहिर सी बात है कि मीरा ने उसकी सेवा में 6 से 7 साल लगा दिए बिना किसी स्वार्थ के उसके मन में रोहनके लिए प्यार जागा ही है! पूरे 7 साल बाद मीरा की मेहनत निष्ठा प्यार कामयाब हो जाता है ! रोहन का मानसिक संतुलन एक वक्त पर आकर बिल्कुल सही हो जाता है !रोहन अब सही हो चुका है! वह दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं !विदेश में मीरा की दोस्त बन जाती है !जो एक बहुत बड़ी बिजनेसमैन है !मीरा को भी जॉब दे देती है !मीरा और रोहन शादी का फैसला लेते हैं, और एक शानदार पार्टी करते हैं करते हैं, रिंग सेरेमनी का फंक्शन करते हैं ,मीरा और रोहन की शादी में बहुत लोग इकट्ठे होते हैं , मीरा सजी हुई खड़ी है, रोहन के सामने दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते हैं ,तभी उस पार्टी में भूचाल मच जाता है !उस पार्टी में रोहन की पहली गुनेगार पत्नी कामिनी आती है !अपने बाप और भाई के साथ! रोहन कामिनी से नफरत करता था! कामिनी मीरा से कहती है---
"कामिनी मैं अभी भी रोहन की पत्नी हूं, कानूनन उसकी पहली पत्नी ,यह शादी मेरे डायवोर्स दिए बगैर नहीं हो सकती"
रोहन----" पत्नी कौन पत्नी? पत्नी का मतलब जानती है? अरे तू औरत कहलाने के लायक नहीं है! जिसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी !यह सामने देख रही है, यह है मेरी जिंदगी !मीरा, जिसने मुझे दूसरी जिंदगी दी! अगर मीरा नहीं होती ,तो आज मैं यहां खड़ा नहीं होता!"
कामिनी ----"पर तुमने तो कहा था, कि कामिनी तुम चाहे कुछ भी करो मैं तुम्हें भुला नहीं सकता! तुमने तो कहा था कि कर दी मैंने अपनी सारी जिंदगी तेरे नाम!"
रोहन---" भुला तो मैं भी कुछ नहीं हूं, ठीक कैसे मेरे मां-बाप परिवार सब कुछ तुमने खत्म कर दिया! मेरी आत्मा को तुम ने मार दिया"!
रोहन गुस्से में थप्पड़ मारता है! तो कामिनी बराबर से रोहन को थप्पड़ मारने लगती है! तभी मेरा कामिनी का हाथ रोक लेती है !और मीरा कामिनी से कहती है----
मीरा ----"अगर हाथ लगाया तो हाथ उठाने लायक नहीं बचेगी बेशर्म ,पहले औरत तो बंद पत्नी तो 7 जन्मों में तक नहीं बन पाएगी ,तुझे जवाब चाहिए रोहन से, मुझसे जवाब ले !रोहन मेरे पास आओ"!
सारे समाज, सभी लोगों के सामने ,आज मैं कहती हूं ,"मैं मेरी सारी उम्र ,सारी जिंदगी, मेरा सब कुछ," बस तेरे नाम" बस रोहन के नाम!
मिल गया तुझे जवाब ,अब यहां से जा सकती है तू! तुझे तेरे बाप भाई को जेल में भिजवा दूंगी!
उसी वक्त कामिनी का भाई और बाप गोली चाकू निकालते हैं ,और धमकी से पार्टी के सभी लोगों को वहां हॉल से भगा देते हैं !अब हॉल में बस कामिनी रोहन वीरा कामिनी का भाई शेखर और उसका बाप होता है , उनके कुछ गुंडे साथ में होते हैं ,वह गुंडे रोहन को कसकर पकड़ लेते हैं! म मीरा बहुत चिल्लाती है, रोहन को छोड़ देने के लिए कहती है, कामिनी का भाई शेखर रोहन को छोड़ने की दो मांगे रखता है !शेखर को छोड़ दूंगा मैं ,उसके बदले तुम दोनों को अपना मुंह बंद रखना होगा, पुलिस को जा कर यह नहीं बताओगे कि रोहन के मां-बाप के कातिल हम हैं!
मीरा डर कर शेखर की बात मान लेती है!
मीरा कहती है--- हां हम कहीं पुलिस के पास नहीं जाएंगे! बस आप मेरे रोहन को छोड़ दो प्लीज , बहुत समय बाद इनको एक जिंदगी मिली है , इनसे यह मत छीनो!
शेखर ---यह तो हो गई काम की बात ,अब दूसरी मांग पूरी कर सकती हो मीरा??
मीरा ----हां मैं करूंगी ,लेकिन प्लीज उन्हें छोड़ दो ,रोहन को छोड़ दो प्लीज!
शेखर ----मेरे साथ सो सकती है? एक रात बिता सकती है? अगर हां, तो रोहन को छोड़कर हम लोग यहां से चले जाएंगे चुपचाप!
मेरा सोचती है गहराई तक ,रोहन उससे कहता है-- चिल्ला चिल्ला कर ,यह मत करना, लेकिन मीरा के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी , वह ध्यान में खो जाती है और सोचती है!
शेखर--- बोलो कर सकती हो यह मेरे साथ ?बस एक रात की बात है, फिर सारी जिंदगी तो रोहन के साथ ही सोना है, जवाब दो इतना वक्त नहीं है,
रोहन चिल्लाकर कहता है ---तुम ऐसा नहीं कर सकती ! मीरा जवाब देती है----
हां कर सकती हूं!
मीरा की आंख आंसुओं से भर जाती है! शेखर, रोहन की आंखों के सामने मीरा को कमरे में ले जाता है ! उसका बलात्कार कर देता है ,या इसे मजबूरी में किया एक समझौता समझो!
मीरा रोहन को बचाने के लिए यह सब शेखर के साथ कर लेती है ! जब मीरा शेखर के साथ कमरे से बाहर आती है, रोहन चिल्ला चिल्ला कर रोता है, किलकारियां मार कर रोता है!
मीरा कहती है--- अब मेरे रोहन को छोड़ दो!
जैसे ही रोहन को छोड़ा जाता है, रोहन बेकाबू हो जाता है, और शेखर को बहुत मारने लगता है, जो उसने मीरा के साथ किया ,यह देखकर शेखर का बाप पीछे से रोहन को गोली चलाने वाला होता है ,तभी रोहन को बचाने के लिए मीरा सामने आ जाती है ,और गोली मीरा के लग जाती है!
मीरा जमीन पर गिर जाती है! तभी रोहन मीरा का नाम बहुत तेज लेकर चिल्लाता है, वह गोली उठा कर एक-एक करके सब को मार देता है! अंत में देखता है ,कि मीरा मर चुकी है ,वह रोता है ,सदमे में आ जाता है ! वह वापस पागलखाना चला जाता है !और अपनी जिंदगी मीरा की यादों में पागल खाने में बिता देता है!
"कामिनी मैं अभी भी रोहन की पत्नी हूं, कानूनन उसकी पहली पत्नी ,यह शादी मेरे डायवोर्स दिए बगैर नहीं हो सकती"
रोहन----" पत्नी कौन पत्नी? पत्नी का मतलब जानती है? अरे तू औरत कहलाने के लायक नहीं है! जिसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी !यह सामने देख रही है, यह है मेरी जिंदगी !मीरा, जिसने मुझे दूसरी जिंदगी दी! अगर मीरा नहीं होती ,तो आज मैं यहां खड़ा नहीं होता!"
कामिनी ----"पर तुमने तो कहा था, कि कामिनी तुम चाहे कुछ भी करो मैं तुम्हें भुला नहीं सकता! तुमने तो कहा था कि कर दी मैंने अपनी सारी जिंदगी तेरे नाम!"
रोहन---" भुला तो मैं भी कुछ नहीं हूं, ठीक कैसे मेरे मां-बाप परिवार सब कुछ तुमने खत्म कर दिया! मेरी आत्मा को तुम ने मार दिया"!
रोहन गुस्से में थप्पड़ मारता है! तो कामिनी बराबर से रोहन को थप्पड़ मारने लगती है! तभी मेरा कामिनी का हाथ रोक लेती है !और मीरा कामिनी से कहती है----
मीरा ----"अगर हाथ लगाया तो हाथ उठाने लायक नहीं बचेगी बेशर्म ,पहले औरत तो बंद पत्नी तो 7 जन्मों में तक नहीं बन पाएगी ,तुझे जवाब चाहिए रोहन से, मुझसे जवाब ले !रोहन मेरे पास आओ"!
सारे समाज, सभी लोगों के सामने ,आज मैं कहती हूं ,"मैं मेरी सारी उम्र ,सारी जिंदगी, मेरा सब कुछ," बस तेरे नाम" बस रोहन के नाम!
मिल गया तुझे जवाब ,अब यहां से जा सकती है तू! तुझे तेरे बाप भाई को जेल में भिजवा दूंगी!
उसी वक्त कामिनी का भाई और बाप गोली चाकू निकालते हैं ,और धमकी से पार्टी के सभी लोगों को वहां हॉल से भगा देते हैं !अब हॉल में बस कामिनी रोहन वीरा कामिनी का भाई शेखर और उसका बाप होता है , उनके कुछ गुंडे साथ में होते हैं ,वह गुंडे रोहन को कसकर पकड़ लेते हैं! म मीरा बहुत चिल्लाती है, रोहन को छोड़ देने के लिए कहती है, कामिनी का भाई शेखर रोहन को छोड़ने की दो मांगे रखता है !शेखर को छोड़ दूंगा मैं ,उसके बदले तुम दोनों को अपना मुंह बंद रखना होगा, पुलिस को जा कर यह नहीं बताओगे कि रोहन के मां-बाप के कातिल हम हैं!
मीरा डर कर शेखर की बात मान लेती है!
मीरा कहती है--- हां हम कहीं पुलिस के पास नहीं जाएंगे! बस आप मेरे रोहन को छोड़ दो प्लीज , बहुत समय बाद इनको एक जिंदगी मिली है , इनसे यह मत छीनो!
शेखर ---यह तो हो गई काम की बात ,अब दूसरी मांग पूरी कर सकती हो मीरा??
मीरा ----हां मैं करूंगी ,लेकिन प्लीज उन्हें छोड़ दो ,रोहन को छोड़ दो प्लीज!
शेखर ----मेरे साथ सो सकती है? एक रात बिता सकती है? अगर हां, तो रोहन को छोड़कर हम लोग यहां से चले जाएंगे चुपचाप!
मेरा सोचती है गहराई तक ,रोहन उससे कहता है-- चिल्ला चिल्ला कर ,यह मत करना, लेकिन मीरा के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी , वह ध्यान में खो जाती है और सोचती है!
शेखर--- बोलो कर सकती हो यह मेरे साथ ?बस एक रात की बात है, फिर सारी जिंदगी तो रोहन के साथ ही सोना है, जवाब दो इतना वक्त नहीं है,
रोहन चिल्लाकर कहता है ---तुम ऐसा नहीं कर सकती ! मीरा जवाब देती है----
हां कर सकती हूं!
मीरा की आंख आंसुओं से भर जाती है! शेखर, रोहन की आंखों के सामने मीरा को कमरे में ले जाता है ! उसका बलात्कार कर देता है ,या इसे मजबूरी में किया एक समझौता समझो!
मीरा रोहन को बचाने के लिए यह सब शेखर के साथ कर लेती है ! जब मीरा शेखर के साथ कमरे से बाहर आती है, रोहन चिल्ला चिल्ला कर रोता है, किलकारियां मार कर रोता है!
मीरा कहती है--- अब मेरे रोहन को छोड़ दो!
जैसे ही रोहन को छोड़ा जाता है, रोहन बेकाबू हो जाता है, और शेखर को बहुत मारने लगता है, जो उसने मीरा के साथ किया ,यह देखकर शेखर का बाप पीछे से रोहन को गोली चलाने वाला होता है ,तभी रोहन को बचाने के लिए मीरा सामने आ जाती है ,और गोली मीरा के लग जाती है!
मीरा जमीन पर गिर जाती है! तभी रोहन मीरा का नाम बहुत तेज लेकर चिल्लाता है, वह गोली उठा कर एक-एक करके सब को मार देता है! अंत में देखता है ,कि मीरा मर चुकी है ,वह रोता है ,सदमे में आ जाता है ! वह वापस पागलखाना चला जाता है !और अपनी जिंदगी मीरा की यादों में पागल खाने में बिता देता है!
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