सेल्फ कंपोज्ड शायरियां

तुझसे मोहब्बत करने का गुनाह जब हम कर बैठे
तुझे हंसता देख दिल से बड़ा खुश हो लेते
ख्वाहिश बन कर आई थी तू मेरी राहों में
तुझे खोने से पहले काश तेरे चेहरे को जरा पढ़ लेते

आया तो था तेरी दुनिया को जन्नत बनाने
मेरी सांसो को मैंने कभी गौर से महसूस नहीं किया!
आंखें खुली तो देखा
 वो  मरने से पहले आई थी अपनी बीती दास्तां बताने!

खिलते हैं फूल वहां
मोहब्बत होती है जहां
महकती है खुशबू वहां
महफिल सजती है जहां!
दिल से निकली तो बद्दुआ भी पवित्र होती है!
हर दुआ पूरी होती है
सच्ची चाहत होती है जहां!

बरसों पहले आया था कोई एक ख्वाब बनकर
बड़े इत्मीनान से अपनी जिंदगी बनाया था उसको!
एक अजीब सी कशमकश थी उसमें
आज आई है मेरे पास खुद चलकर
इतनी मुश्किलों से जीने की वजह बनाया था जिसको!

बैठा है वह अकेला मेरे इंतजार में
खोया है वो हमारी चाहत के दीदार में!
मैंने बहुत कहा चली जा अकेला छोड़कर मुझे
यहां किसी को मंजूर नहीं हमारा साथ
होश आया तो पता चला
खुदा ने भी बनाया था मेरे लिए तुझे इस संसार में!

शायराना बन कर आए थे तेरे दर पर हम दीवाने
बाजुओं में जो तेरे गुजारे वो पल  थे मस्ताने!
न दिए होते  अश्क तूने इस मोहब्बत में अगर
क्या खूब याद करते हमें भी दुनिया के वो परवाने!





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