मैंने अपनी जिंदगी को कुछ यूं ही आसान बना लिया

मैंने अपनी जिंदगी को,
कुछ यूं ही आसान बना लिया!
कभी किसी को माफी दे दी,
कभी किसी को माफ कर दिया!

रिश्ते परखना तो सब जानते हैं,
 पर रिश्ते निभाना कोई नहीं जानता!
शोलों से तप कर खुद को,
 कुछ यूं ही मजबूत बना लिया,
कभी किसी को तन्हाई देदी,
कभी खुद को तन्हा बना लिया!


हूं मैं दूर सभी दिखावों से,
ऐसे लोग दिल जीता करते हैं,
करता हूं मैं कर्म पूजा,
भले ही लोग पत्थर को पूजा करते हैं!
अपनों को खो कर मैंने खुद को,
कुछ यूं ही पत्थर बना लिया,
कभी किसी को आंसू दे दिए,
कभी खुद को आंसुओं में भिगो दिया!

अनुभवों से मैंने  जिंदगी को,
कुछ यूं ही महान बना लिया!
कभी अपनों को जिंदगी जीना सिखा दिया,
कभी जिंदगी ने अपनों के बिना जीना सिखा दिया!
मैंने अपनी जिंदगी को कुछ,
यूं ही आसान बना लिया !
कभी किसी को माफी दे दी,
कभी किसी को माफ कर दिया!!








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