ब्रह्मांड में आदमी की हैसियतsak
मेरा विषय किसी जाति धर्म नस्ल समुदाय संप्रदाय तथा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं है, बस कुछ अपने विचार रखना चाहती हूं. बहुत लोगों को अक्सर कहते सुना है ,ऊपर तक मेरी पहुंच है, इतनी मेरी हैसियत है ,मेरे सामने तेरी क्या औकात है, बहुत लोगों को मैंने अपनी जाति धर्म वह वर्ग पर घमंड करते देखा है, यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि मैंने लोगों को कहते सुना है जो अपने किसी जाति विशेष को संबोधित कर घमंड प्रदर्शित करता है. पर मेरा मानना यह है अपनी जाति धर्म वर्ग ऐसी कोई वस्तु पर क्या अहंकार करना जो हमें दूसरों से प्राप्त हो, उस वस्तु पर क्या घमंड करना जो हमें किसी और से मिली हो, किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि इंसान जन्म तो अकेले होता है पर दुनिया में आकर वह कई सारी जंजीरों में बंध जाता है. जाति व धर्म किसी भी व्यक्ति को दूसरों से मिला है, जब व्यक्ति पैदा होता है उसको नहीं पता होता कि वह किस जाति से है किस धर्म से है, फिर भी दुनिया में आने के बाद उसको न जाने कितने धर्म कितने जातियों के साथ बांध दिया जाता है. जाति और धर्म को प्राप्त करने में मनुष्य ने कोई मेहनत नहीं की ये उसको दूसरों से प्राप्त हुई, और जो वस्तु मनुष्य को दूसरों से प्राप्त हो उसे उस वस्तु का अहंकार कैसा? मनुष्य को अहंकार उसके कर्मों पर होनी चाहिए, उसके कर्मों से समाज में वह कैसी हैसियत को प्राप्त करता है, उसको अपने काम पर घमंड होना चाहिए, जिसमें मनुष्य मेहनत करता है, वह उसकी निजी मेहनत है क्या उसने किसी से प्राप्त नहीं की, मनुष्य को घमंड अपने कर्म पर होना चाहिए ना की जाति व धर्म पर. पर ऐसा कहने वाले उनका आदर और सम्मान जाति व धर्म की वजह से समाज में होता है. ऐसा
कहने वाले क्या सच में जागरूक है कि उनकी इस ब्रह्मांड में क्या हैसियत है ? कभी सोचा है यह ब्रह्मांड कितना बड़ा है? ब्रह्मांड में आकाशगंगा कितनी बड़ी है? आकाशगंगा में पृथ्वी कितनी बड़ी है? पृथ्वी पर दुनिया कितनी बड़ी है? दुनिया में देश कितना बड़ा है ?देश में शहर कितना बड़ा है ?शहर में नगर नगर में घर तथा घर में आदमी कितना बड़ा है? आदमी की बस इतनी सी हैसियत है, समाज में सम्मान पाना अति आवश्यक है ,अस्तित्व का होना बहुत आवश्यक है, परंतु उसके पीछे झूठे मुखोटे को रखना गलत है. धन से कमाया समाज में सम्मान असल मायनों में सम्मान नहीं कहलाता, उसकी पहचान उसके कर्मो से होती है .वहीं पहचान समाज में जरूरी है. डॉक्टर इंजीनियर नेता यह सभी एक व्यवसाय है ,पर इस व्यवसाय का उपयोग करके वह समाज के लोगों के हित के लिए करके जाता है ,असल मायनों में जीवन जीना उसे कहते हैं .बाकी सब कुछ बचा खुचा एक व्यवसाय है ,ऐसे लोगों के लिए करना जो खुशहाली के जीवन से शुरू से वंचित रहे हैं .उन लोगों के लिए करना ही असल मायनों में जीवन जीना कहलाता है.
अपने लिए तो जानवर भी करके जाता है .अंत में मैं यही कुछ कहना चाहती हूं , "ऐसा व्यक्ति जिसको बचाने के लिए, जिसके सम्मान के लिए पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाए ,यही हैसियत, ऐसे अस्तित्व को प्राप्त करना, समाज में मनुष्य की सच्ची हैसियत को बताता है."
कहने वाले क्या सच में जागरूक है कि उनकी इस ब्रह्मांड में क्या हैसियत है ? कभी सोचा है यह ब्रह्मांड कितना बड़ा है? ब्रह्मांड में आकाशगंगा कितनी बड़ी है? आकाशगंगा में पृथ्वी कितनी बड़ी है? पृथ्वी पर दुनिया कितनी बड़ी है? दुनिया में देश कितना बड़ा है ?देश में शहर कितना बड़ा है ?शहर में नगर नगर में घर तथा घर में आदमी कितना बड़ा है? आदमी की बस इतनी सी हैसियत है, समाज में सम्मान पाना अति आवश्यक है ,अस्तित्व का होना बहुत आवश्यक है, परंतु उसके पीछे झूठे मुखोटे को रखना गलत है. धन से कमाया समाज में सम्मान असल मायनों में सम्मान नहीं कहलाता, उसकी पहचान उसके कर्मो से होती है .वहीं पहचान समाज में जरूरी है. डॉक्टर इंजीनियर नेता यह सभी एक व्यवसाय है ,पर इस व्यवसाय का उपयोग करके वह समाज के लोगों के हित के लिए करके जाता है ,असल मायनों में जीवन जीना उसे कहते हैं .बाकी सब कुछ बचा खुचा एक व्यवसाय है ,ऐसे लोगों के लिए करना जो खुशहाली के जीवन से शुरू से वंचित रहे हैं .उन लोगों के लिए करना ही असल मायनों में जीवन जीना कहलाता है.
अपने लिए तो जानवर भी करके जाता है .अंत में मैं यही कुछ कहना चाहती हूं , "ऐसा व्यक्ति जिसको बचाने के लिए, जिसके सम्मान के लिए पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाए ,यही हैसियत, ऐसे अस्तित्व को प्राप्त करना, समाज में मनुष्य की सच्ची हैसियत को बताता है."
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