यह देश अब तक गुलाम है ना जाने कितने जमानों से
कहां छुपकर बैठे हो
मेरे देश के जवानों
चार दीवारों से निकल और देख
ये देश अबतक गुलाम है
चार दीवारों से निकल और देख
ये देश अबतक गुलाम है
ना जाने कितने ज़मानो से!!
तू अंधा बहरा और अपाहिज तो है ही
जल्द ही गूंगा भी हो जाएगा
जब तेरा देश तेरी
तू अंधा बहरा और अपाहिज तो है ही
जल्द ही गूंगा भी हो जाएगा
जब तेरा देश तेरी
आँखों के सामने बर्बाद हो जाएगा!
कहां छुपकर बैठे हो
कहां छुपकर बैठे हो
मेरे देश के जवानों
चार - - - - - - - - - - - - - - - - ज़मानो से!!
ये देश अबतक गुलाम है
चार - - - - - - - - - - - - - - - - ज़मानो से!!
ये देश अबतक गुलाम है
ना जाने कितने ज़मानो से-2
कितनी सच्चाई है इस तर्क में
आज मेरा जवाब है
कितनी सच्चाई है इस तर्क में
आज मेरा जवाब है
मेरे खुद के सवालों से
हाँ ये देश अबतक गुलाम है
हाँ ये देश अबतक गुलाम है
ना जाने कितने ज़मानो से!
कहां छुपकर बैठे-------------------ज़मानो से!!
कौन है वो शख्स अखिर
कहां छुपकर बैठे-------------------ज़मानो से!!
कौन है वो शख्स अखिर
जिक्र से जिनके जिस्म मे
हलचल मच जाती है
मेरा पैगाम है आज
मेरा पैगाम है आज
मेरे देश के जवानों से
तू कुछ कर या ना कर,
तू कुछ कर या ना कर,
पर तू कर जाना
देश के लिए अपने कुछ जज़्बातों से!
राख का हर एक कण
देश के लिए अपने कुछ जज़्बातों से!
राख का हर एक कण
मेरी गर्मी से गतिमान है
मैं एक ऐसा पागल हूं
जो जेल में भी आजाद है
इतिहास वो नहीं जो लिखा गया
इतिहास वो है जो नहीं लिखा गया
कुछ प्रतिज्ञा उन्होंने ली थी कल
कुछ प्रतिज्ञा आज तुम लेलो
मिट गए थे जो देश पे
वो इंतकाम आज तुम लेलो!
कहाँ छुपकर - - - - - - - - - - - - - - - ज़मानो से!!
उतार दो सर से बोझ उनके
लगे उनपर सभी इल्ज़ामो से
ये देश अबतक गुलाम है
ना जाने कितने ज़मानो से!
कहां छुपकर बैठे हो मेरे देश के जवानों
चार दीवारों से निकल और देख
ये देश अबतक गुलाम है
ना जाने कितने ज़मानो से!!
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